मध्यम वर्ग का एक हिस्सा मोदी के ख़िलाफ़ , लोकप्रियता 13 % तक गिरी। 



भारत में कहर ढा रही कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने समाज के हर तबके को प्रभावित किया है। वायरस की पहली लहर इतनी अधिक भयावह नहीं थी। मई के पहले सप्ताह में एक दिन में संक्रमित लोगों का आंकड़ा चार लाख और मृतकों की संख्या चार हजार से अधिक हो चुकी है। अस्पतालों में लोग बेड, ऑक्सीजन सिलेंडर और दवाइयों की कमी से जूझ रहे हैं। मध्यम वर्ग के बहुत बड़े हिस्से पर संकट की जबर्दस्त मार पड़ी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन करने वाला यह वर्ग अब बेचैन है। वह मोदी के खिलाफ सोशल मीडिया पर सामने आया है। ग्लोबल लीडर्स एप्रूवल रेटिंग ट्रैकर के अनुसार मोदी की लोकप्रियता में 13% की गिरावट आई है।

चुनाव बताएंगे मोदी से मध्यम वर्ग कितना नाराज

2020 में कुछ घंटे के नोटिस पर लागू लॉकडाउन ने अर्थव्यवस्था में नाटकीय गिरावट पैदा की थी। अक्टूबर 2020 में औसत पारिवारिक आमदनी पिछले साल के मुकाबले 12% कम हो गई। प्यू रिपोर्ट के अनुसार गरीबों के साथ लोअर मिडिल क्लास पर भी आर्थिक बोझ पड़ा है। भारत में 2024 तक आमचुनाव नहीं होंगे। लेकिन, राज्य विधानसभा के चुनावों खासकर बंगाल में भाजपा को निराशा हाथ लगी है। हालांकि वर्तमान संकट के व्यापक राजनीतिक प्रभाव का अाकलन करना अभी जल्दबाजी होगी लेकिन मोदी की रेटिंग उतार पर है।

मॉर्निंग कंसल्ट ग्लोबल लीडर्स एप्रूवल रेटिंग ट्रैकर और अन्य सर्वे डेटा के अनुसार अगस्त 2019 से जनवरी 2021 के बीच मोदी की एप्रूवल रेटिंग लगभग 80% के आसपास रही। मतलब इतने प्रतिशत लोग उनके कामकाज को पसंद करते थे। इस वर्ष अप्रैल में रेटिंग 67% हो गई है। यानी मोदी की लोकप्रियत 13% कम हो गई है। अगले साल उत्तरप्रदेश सहित कुछ राज्यों के विधानसभा चुनावों से कोविड-19 के राजनीतिक असर का आकलन हो सकेगा। विशेषज्ञ कहते हैं, संकट का सामना सही तरीके से ना करने और स्थिति की गंभीरता की अनदेखी के कारण मोदी का मध्यम वर्गीय आधार प्रभावित हो सकता है।  

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